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अध्याय १ शलोक २६ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक २६ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 26 Shloka 26 इसके बाद पृथापुत्र अर्जुन ने उन दोनों ही सेनाओं में स्थित ताऊ-चाचों को, दादों-परदादों को, गुरुओं को, मामाओं को, भाइयों-पुत्रों को, पौत्रों को तथा मित्रों को, ससुरों को और सुह्रदों को भी देखा  ।। २६ ।। ARJUNA, gazed upon […]

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अध्याय १ शलोक २४,२५ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक २४,२५ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 24-25 Shloka 24 25 संजय बोले —– हे धृतराष्ट्र ! अर्जुन द्वारा इस प्रकार कहे हुए महाराज श्रीकृष्णचन्द्र ने दोनों सेनाओं के बीच में भीष्म और द्रोणाचार्य के सामने तथा सम्पूर्ण राजाओं के सामने उत्तम रथ को खड़ा कर के इस प्रकार

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अध्याय १ शलोक २३ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक २३ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 23 Shola 23 दुर्बुद्भि दुर्योधन का युद्ध में हित चाहनेवाले जो-जो ये राजा लोग इस सेना में आये हैं, इन युद्ध करनेवालों कों मैं देखूंगा ।। २३ ।। I desire to see all of those great warrior kings who have gathered here

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अध्याय १ शलोक २२ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक २२ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 22 Shloka 22 और जब तक की मैं युद्धक्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इन विपक्षी योद्धाओं को भली प्रकार देख लू कि इस युद्ध रूप व्यापार में मुझे किन-किनके साथ युद्ध करना योग्य है, तब तक उसे खड़ा रखिये ।।

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अध्याय १ शलोक २०,२१ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक २०,२१ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 20-21 Shloka 20  21 हे राजन् ! इसके बाद कपिध्वज अर्जुन ने मोर्चा बाँधकर डटे हुए धृतराष्ट्र-सम्बन्धियों को देखकर उस शस्त्र चलने की तैयारी के समय धनुष उठाकर ह्रषीकेश श्रीकृष्ण महाराज से यह वचन कहा —— हे अच्युत ! मेरे रथको दोनों

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अध्याय १ शलोक १९ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक १९ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 19 Shloka 19 और उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी-को भी गुँजाते हुए धार्तराष्ट्रों के अर्थात् आपके पक्षवालों के ह्रदय विदीर्ण कर दिये ।। १९ ।। The earth and sky was filled with the extremely loud and terrible noise of the

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अध्याय १ शलोक १७,१८ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक १७,१८ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 17-18 Shloka 17   18 श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी एवं धृष्टधुम्न तथा राजा विराट और अजेय सात्यकि राजा द्रु पद एवं द्रौपदी के पाँचो पुत्र और बड़ी भुजावाले सुभद्रापुत्र अभिमन्यु —- इन सभी ने, हे राजन् ! सब ओर से अलग-अलग

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अध्याय १ शलोक १६ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक १६ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 16 Shloka 16 कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्तविजय-नामक और नकुल तथा सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाये ।। १६ ।। The King YUDISHTHIRA. the son of KUNTI blew the great conch called ANANTAVIYAYA: NAKUL and  SAHDEV blew SUGHOSHA and MANIPUSHPAKA

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अध्याय १ शलोक १५ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक १५ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 15 Shloka 15 श्रीकृष्ण महाराज ने पाञ्चजन्य-नामक, अर्जुन ने देवदत्त-नामक और भयानक कर्मवाले भीमसेन ने पौण्ड्र-नामक महाशंख बजाया ।। १५ ।। The PANCHAJANYA (the name of one of the conches) was blown by HRISHIKESA (Lord Krishna). The conch named DEVADATTA was blown

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अध्याय १ शलोक १४ – गीता हिंदी

अध्याय  १ शलोक १४ – गीता हिंदी   The Gita – Chapter 1 – Shloka 14 Shloka 14 इसके अनन्तर सफेद घोडों से युक्त्त उत्तम रथ में बैठे हुए श्रीकृष्ण महाराज और अर्जुन ने भी अलौकिक शंख बजाये ।। १४ ।। MADHAVA (Lord Krishna) and PANDAVA were seated in their magnificent chariote attached to white horses and

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