उम्मीद खो देना

उम्मीद खो देना अध्याय – 4 – श्लोक -11 हे अर्जुन ! जो भक्त्त मुझे जिस प्रकार भजते हैं, मैं भी उन को उसी प्रकार

Read More »

भेदभाव

भेदभाव अध्याय – 5 – श्लोक -18 वे ज्ञानी जन विद्या और विनय युक्त्त ब्राह्मण में तथा गौ, हाथी, कुत्ते और चाण्डाल में भी समदर्शी

Read More »

अनियंत्रित मन

अनियंत्रित मन अध्याय – 6 – श्लोक -5 अपने द्वारा अपना संसार समुद्र से उद्बार करे और अपने को अधोगति में न डाले ; क्योंकि

Read More »

अकेलापन

अकेलापन अध्याय – 6 – श्लोक -30 जो पुरुष सम्पूर्ण भूतों में सबके आत्मरूप मुझ वासुदेव को ही व्यापक देखता है और सम्पूर्ण भूतों को मुझ

Read More »

निराशा

निराशा अध्याय – 2 – श्लोक -3 इसलिये हे अर्जुन ! नपुंसकता को मत प्राप्त हो, तुझमें यह उचित नहीं जान पड़ती । हे परंतप

Read More »

प्रलोभन

प्रलोभन अध्याय – 2 – श्लोक -60 हे अर्जुन ! आसक्त्ति का नाश न होने के कारण ये प्रमथन स्वभाव वाली इन्द्रियाँ यत्त्न करते हुए

Read More »

आलस्य

आलस्य अध्याय – 3 – श्लोक -8 उस महापुरुष का इस विश्व में न तो कर्म करने से कोई प्रयोजन रहता है और न कर्मों

Read More »

प्रेरणाहीन

प्रेरणाहीन अध्याय – 11 – श्लोक -33 अतएव तू उठ ! यश प्राप्त कर और शत्रुओं को जीत कर धन-धान्य सम्पन्न राज्य को भोग ।

Read More »

मृत्यु

मृत्यु अध्याय – 2 – श्लोक -13 जैसे जीवात्मा इस देह में बालकपन, जवानी और वृद्बावस्था होती है, वैसे ही अन्य शरीर की प्राप्ति होती

Read More »

लोभ-लालच

लोभ-लालच अध्याय – 14 – श्लोक -17 सत्वगुण से ज्ञान उत्पन्न होता है और रजोगुण से निस्संदेह लोभ तथा तमोगुण से प्रमाद और मोह उत्पन्न

Read More »
Contact Form Demo (#3)
Facebook
X
LinkedIn
Scroll to Top