Author name: TheGita Hindi

अध्याय १० शलोक २७

अध्याय १० शलोक २७ The Gita – Chapter 10 – Shloka 27 Shloka 27  घोड़ो में अमृत के साथ उत्पन्न होने वाला उच्चैःश्रवा नामक घोड़ा, श्रेष्ट हाथियों में ऐरावत नामक हाथी और मनुष्यों में राजा मुझको जान ।। २७ ।। I am the horse of Indra among horses; and of elephants, Indra’s elephant Airavat. Among […]

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अध्याय १० शलोक २६

अध्याय १० शलोक २६ The Gita – Chapter 10 – Shloka 26 Shloka 26  मैं समस्त वृक्षो में पीपल का वृक्ष, देवऋषियो में नारद, गन्धर्वों में चित्ररथ और सिद्धों में कपिल मुनि हूँ |।। २६ ।। Of trees I am the tree of life, and of heavenly seers, Narada. Among celestial musicians I am Chitra-Ratha,

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अध्याय १० शलोक २५

अध्याय १० शलोक २५ The Gita – Chapter 10 – Shloka 25 Shloka 25  मै महर्षियों में भृगु और शब्दों में एक अक्षर अर्थात् ओंकार हूँ ।  सब प्रकार से यज्ञों में जप यज्ञ और स्थिर रहने वालों में हिमालय पहाड़ हूँ ।। २५ ।। I am Bhrigu among great seers and of words I

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अध्याय १० शलोक २४

अध्याय १० शलोक २४ The Gita – Chapter 10 – Shloka 24 Shloka 24  पुरोहितों में मुखिया बृहस्पति मुझको जान । हे पार्थ ! मैं सेनापतियों में स्कन्द और जलाशयों में समुद्र हूँ ।। २४ ।। I am the divine priest, Brihaspati among the priest, and among warriers Skanda, the God of war. Of lakes I

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अध्याय १० शलोक २३

अध्याय १० शलोक २३ The Gita – Chapter 10 – Shloka 23 Shloka 23  मैं एकादश रुद्रों में शंकर हूँ और यक्ष तथा राक्षसों में धन का स्वामी कुबेर हूँ । मै आठ वसुओ में अग्नि हूँ और शिखर वाले पर्वतों में सुमेरु पर्वत हूँ ।। २३ ।। I am the God of Destruction among

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अध्याय १० शलोक २२

अध्याय १० शलोक २२ The Gita – Chapter 10 – Shloka 22 Shloka 22  मै वेदों में सामवेद हूँ, देवों में इन्द्र हूँ, इन्द्रियों में मन हूँ और भूत-प्राणियों की चेतना अर्थात् जीवन शक्त्ति हूँ ।। २२ ।। Of the Vedas I am the Veda of songs, I am Indra, the Chief of Gods I am

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अध्याय १० शलोक २१

अध्याय १० शलोक २१ The Gita – Chapter 10 – Shloka 21 Shloka 21  मै अदिति के बारह पुत्रों में विष्णु और ज्योतियों में किरणों वाला सूर्य हूँ तथा मैं उन्नचास वायु देवताओं का तेज और नक्षत्रों का अधिपति चन्द्रमा हूँ ।। २१ ।। Among the sons of light I am Vishnu; of radiances, the

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अध्याय १० शलोक २०

अध्याय १० शलोक २० The Gita – Chapter 10 – Shloka 20 Shloka 20  हे अर्जुन ! मैं सब भूतों के ह्रदय में स्थित सबका आत्मा हूँ तथा सम्पूर्ण भूतों का आदि, मध्य और अन्त भी मैं ही हूँ ।। २० ।। I, O Gudakesha (the conqueror of slumber) am the soul, seated in the

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अध्याय १० शलोक १९

अध्याय १० शलोक १९ The Gita – Chapter 10 – Shloka 19 Shloka 19  श्रीभगवान् बोले—हे कुरूश्रेष्ठ ! अब मैं जो मेरी दिव्य विभूतियां हैं, उनको तेरे लिये प्रधानता से कहूँगा; क्योंकि मेरे विस्तार का अन्त नहीं है ।। १९ ।। The Blessed Lord said: You are blessed O Best of the KURUS; hence I will

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अध्याय १० शलोक १८

अध्याय १० शलोक १८ The Gita – Chapter 10 – Shloka 18 Shloka 18  हे जनार्दन ! अपनी योग शक्त्ति को और विभूति को फिर भी विस्तार पूर्वक कहिये; क्योकि आपके अमृत मय वचनों को सुनते हुए मेरी तृप्ति नहीं होती अर्थात् सुनने की उत्कण्ठा बनी ही रहती है ।। १८ ।। Arjuna demanded further: Lord Krishna,

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